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Monday, July 25, 2016

उड़ता पंजाब, रगड़ता पंजाब..तो ठोको ताली

कभी पांच नदियों और धन-धान से भरपूर प्रदेश के रूप में पहचान कायम रखने वाला पंजाब कब ‘उड़ता पंजाब’ बन गया किसी को पता ही नहीं चला। धीरे-धीरे यहां की जवानी में ड्रग्स घुल गई और हुक्मरान हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। प्रदेश के कद्दावर मंत्री पर नशे के सबसे बड़े कारोबारी होने का आरोप लगा, पर उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका। पाकिस्तान से लगते बॉर्डर से नशे की तस्करी होती रही, लेकिन पंजाब की पुलिस हाथ पर हाथ रखे तमाशा देखती रही। इसी बॉर्डर एरिया के एसपी पर तस्करों के साथ लिप्त होने की बात सामने आई, लेकिन कहानी में कई तरह के पेंच फंस गए। हद तो यह कि ‘उड़ते पंजाब’ से जुड़े एक आरोपी अधिकारी से जुड़ी जांच की बात पंजाब पुलिस के डीआईजी रैंक के अधिकारी को इतनी चुभ गई कि मीडिया को ही रगड़ डालने की चुनौती दे डाली।
पंजाब में नशे से जुड़ी बातें अब कोई नई बात नहीं रह गई है। राजनेताओं से लेकर पुलिस अधिकारियों तक की इसमें मिली भगत भी कई बार सार्वजनिक हो चुकी हैं। चुनावी साल होने के कारण पंजाब में नशे का कारोबार भी बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। अकाली दल और बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पंजाब की धरती पर लगे नशे के दाग को कहां तक धोएं। वहीं कांग्रेस इस मौके को जबर्दस्त तरीके से हाईलाइट करने में जुटी है कि कैसे पिछले चंद सालों में पंजाब ने अपनी पहचान खो दी है और नई पहचान बना ली है।
कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा मुद्दा इसलिए भी है कि क्योंकि प्रदेश का एक कद्दावर नेता भी ड्रग्स माफियाओं के संरक्षक के रूप में बदनाम हो चुका है। कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी ने भी इस बार पंजाब के चुनावी मैदान में अपनी जबर्दस्त उपस्थिति दर्ज कराकर अहसास करा दिया है कि मुकाबला जोरदार रहेगा। आम आदमी पार्टी लगातार बादल सरकार और कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर हमलावर है। ऐसे में पंजाब में बीजेपी के बड़े चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले नवजोद सिंह सिद्धू का यूं रूठ कर पार्टी छोड़ देना भी बड़ी बात बन चुकी है। सिद्धू अब किस करवट बैठकर ताली ठोकेंगे यह तो वह ही जानें, लेकिन इतना तो तय है कि ड्रग्स तस्करी के मुद्दे को सिद्धू से ज्यादा दमदार तरीके से कोई और नहीं उठा सकता है।
पंजाब को ड्रग्स तस्करी के हब के रूप में विकसित करने में प्रदेश की पुलिस ने भी कोई कम योगदान नहीं दिया है। बॉर्डर एरिया पर चाक चौबंद सुरक्षा की राजनीति किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश सरकार और बीएसएफ के बीच तानातनी कई मौकों पर सामने भी आ चुकी है। चाहे वह गुरदासपुर में आतंकी हमले का मामला हो या पठानकोट से जुड़ा मामला। हर बार सुरक्षा को लेकर बीएसएफ और प्रदेश सरकार के बीच अंदरूनी जंग चलती रही है। पर इन सबके बीच सबसे अहम कड़ी ड्रग्स तस्करी को लेकर जुड़ती है।
पठानकोट हमले के दौरान चर्चा में आए पंजाब पुलिस के एसपी सलविंदर सिंह के रूप में एक ऐसा अहम सुराग एनआईए को हाथ लगा था, जिसने सभी की नींद उड़ा दी थी। बताया गया कि एसपी सलविंदर सिंह के तार तस्करों से जुड़े थे और इसी चक्कर में वे आतंकियों की चंगुल में फंस गए। एनआईए ने कड़ी पूछताछ के बाद एसपी को छोड़ दिया। हालांकि एनआईए ने कभी यह बयान नहीं दिया कि एसपी सलविंदर को क्लीन चिट दे दी गई है, लेकिन पंजाब पुलिस के आला अधिकारियों ने इस बात को प्रचारित करने में कोई कसर बांकि नहीं रखी कि एसपी को क्लीन चिट दे दी गई है। इतना ही नहीं जिस एसपी के खिलाफ यौन शोषण के दो बड़े मामलों के अलावा तस्करों से जुड़े होने के आरोप लगे उसे तत्काल बहाल भी कर दिया जाता है।

एसपी से जुड़ी इतनी बातों ने इस बात की गंभीरता को बढ़ा दिया था कि क्या एसपी के फंस जाने से कई बड़ी मछलियां भी फंस सकती थी? क्या बड़ी मछलियों में राजनेताओं से लेकर पुलिस के आलाधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें अपने फंसने का डर सता रहा था? सबसे गंभीर सवाल तो यह था कि एनआईए की रडार की रेंज में आने के बावजूद एक आरोपी पुलिस अधिकारी इतनी जल्दी कैसे बच गया?
अब एक बार फिर उसी एसपी को बचाने के लिए सरकार से लेकर पुलिस महकमे पर भी पूरा दबाव है। हद तो यह है कि इस दबाव की बात पंजाब पुलिस के डीआईजी रैंक के अधिकारी खुद अपनी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं। पिछले दिनों जब आज समाज के संवाददाता से पंजाब पुलिस के बॉर्डर रेंज के डीआईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने धमकी भरे में लहजे में बातचीत की थी, तो उसी बातचीत में उन्होंने यह भी स्वीकार कर लिया था कि एसपी मामले की जांच में देरी ऊपर के दबाव के कारण है। अब यह ऊपर का दबाव क्या है यह तो या तो डीआईजी साहब ही बता सकते हैं या फिर सरकार। पर इतना तो तय है कि पंजाब में नशे के कारोबार का रैकेट तोड़ना इतना भी आसान नहीं है।

मंथन का वक्त जरूर है कि आखिर जिस उड़ता पंजाब को लेकर राजनीतिक दल अपनी रोटियां सेंकने की तैयारी कर चुके हैं। जिस उड़ता पंजाब को बचाने की सभी बातें कह रहे हैं, उस उड़ता पंजाब को धरती पर लाने के लिए ठोस रोड मैप क्या होगा? आने वाले दिनों में जब तमाम राजनीतिक दल पंजाब से जुड़ा अपना मेनिफेस्टो जारी करेंगे क्या उसमें उस रोड मैप की चर्चा करेंगे? क्या उस मेनिफेस्टो में इस बात का जिक्र होगा कि अगर मीडिया ड्रग्स से जुड़े तारों को छेड़ेगी तो उसे रगड़ने की धमकी देने वाले अफसरों पर कार्रवाई होगी? या फिर पंजाब की जनता इस उड़ता पंजाब और रगड़ता पंजाब के बीच कॉमेडी शो की तरह ताली ठोकती रहेगी।