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Saturday, December 26, 2015

...‘तुमने पुकारा और हम चले आए’

क्या इसे महज संयोग कहा जाए कि जिस सदाबहार अभिनेत्री साधना के निधन पर पूरे भारत के लोग उनकी फिल्म राजकुमार के गाने तुमने पुकारा और हम चले आए...को याद कर रहे थे, ठीक उसी समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दूसरे से मित्रवत बात कर थे। कहा जा रहा है, नरेंद्र मादी ने जिस तरह नवाज शरीफ को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं, ठीक उसी वक्त नवाज शरीफ ने उन्हें पाकिस्तान में डिनर करने का न्योता दे डाला। और संयोग देखिए भारतीय प्रधानमंत्री उसी गाने की तरह.... तुमने पुकारा और हम चले आए, जान हथेली पर ले आए रे.... गुनगुनाते हुए बेखौफ, बिंदास पाकिस्तान के लाहौर में लैंड कर गए। भारतीय इतिहास में यह दिन एक नई इबारत लिख गया। किसी ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि कोई भारतीय प्रधानमंत्री वह भी नरेंद्र मोदी इस तरह अचानक न केवल पाकिस्तान पहुंचेंगे, बल्कि पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टर से नवाज शरीफ के घर पहुंचेंगे। चाहे मौका नवाज शरीफ के जन्म दिन का हो या उनकी नतिनी के विवाह समारोह का, नरेंद्र मोदी की इस पहल ने भारत-पाक के रिश्तों को एक नई ऊंचाई और ऊर्जा देने का प्रयास किया है।
हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाकिस्तान पहुंचीं थीं और सितंबर में नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान दौरे पर मुहर लगाकर आर्इं थीं। पर इससे पहले ही नरेंद्र मोदी का इस तरह पाकिस्तान की सरजमीं पर उतरना खास महत्व रखता है। विपक्षियों ने अपने जल्दबाजी वाले कुतर्कों द्वारा एक बार फिर इस पहल को नौटंकी करार दे दिया है। पर भारतीय जनमानस ने सोशल मीडिया के जरिए अपने विचार साफ कर दिए हैं। दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी चलें... का फॉर्मुला ही भारत-पाक के रिश्तों के बीच जमी बर्फ को पिघला सकता है यह साफ हो चुका है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ ने पहुंचकर पूरे विश्व को चौंका दिया था। नरेंद्र मोदी के इस अविश्वसमरणीय और साहसिक कदम को भले ही आलोचना और तमाम कुतर्कों की कसौटी पर कसकर देखा जाएगा पर सच्चाई यह है कि लंबे समय से इस तरह के अमन के संदेश का पूरा विश्व इंतजार कर रहा था। हां हमें यह भी जरूर नहीं भूलना चाहिए कि इससे पहले भी नरेंद्र मोदी के राजनीतिक गुरु अटल बिहारी वाजपेयी बस लेकर लाहौर पहुंचे थे, उसके बाद पाकिस्तान का दोहरा चरित्र किस तरह सामने आया था। फर्क इतना है कि उस वक्त भारतीय बस लाहौर पहुंची थी, इस बार इंडियन एयर फोर्स का स्पेशल विमान लाहौर की धरती पर पहुंचा। नरेंद्र मोदी ने अपने इस साहसिक कदम से एक ऐसा संदेश दिया है जो लंबे वक्त तक भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ पूरे विश्व में चर्चा के केंद्र में रहेगा। पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर पर अंधाधुंध गोलीबारी, घुसपैठ, आतंकियों को प्रश्रय देने, दाउद और हाफिज सईद जैसे मोस्ट वांटेड को अपने यहां शरण देने जैसे कई मुद्दों पर भी बहसबाजी का दौर शुरू हो चुका है।

इसे सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी की साहसिक यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान के लोकतंत्र में सेना की दूसरी भूमिका है। जब-जब इस तरह के शांति प्रयास हुए हैं पाकिस्तानी सेना ने इस शांति में मिर्च डालने का काम किया है। ऐसे में उन आशंकाओं को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तानी सेना चंद दिनों में ही कुछ ऐसी हरकत कर डाले जिससे फिर खटास उत्पन्न हो। फिलहाल हमें नवाज शरीफ और नरेंद्र मोदी के दोस्ती का दिल खोलकर स्वागत करना चाहिए।