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Tuesday, August 4, 2015

लो जी शुरू हो चुका है पाकिस्तान में मौजूद गीता पर ड्रामा


पिछले दो-तीन दिनों से तमाम न्यूज पेपर्स और न्यूज चैनल्स में सबसे बड़ी स्टोरी बनी है पाकिस्तान की गीता। 13 साल पहले भटककर पाकिस्तान पहुंची इस गूंगी बहरी लड़की की कहानी को ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे हम उसे उसके घर पहुंचा के ही रहेंगे। पता नहीं क्यों मुझे चीढ हो रही है ऐसी स्टोरी से। ऐसा लग रहा है पूरा ड्रामा क्रिएट किया गया। सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान का यह मुझे मार्केटिंग कैंपेन जैसा लग रहा है। नहीं तो अचानक क्यों यह स्टोरी इतनी हाईलाइट होती। वह भी मास लेवल पर इसे प्रचारित और प्रसारित किया जाता।
दरअसल हम मनुष्यों की यह जेनेटिक प्रॉब्लम है कि हम चीजों को बहुत जल्दी भूल जाते हैं। बता दूं कि यह वही लड़की गीता है जिसकी कहानी ने मीडिया की सुर्खियां बटोरी थी वर्ष 2011-2012 में। उस वक्त सोशल मीडिया इतने उफान पर नहीं थी। और न ही बजरंगी भाईजान जैसी फिल्मी कहानी परदे पर अवतरित हुई थी।
2011-12 में सबसे पहले पाकिस्तानी मीडिया ने गीता की स्टोरी को दुनिया को बताया था। 'अमन की आशा' के नाम से उस वक्त यह खबर सुर्खियां बनी थी। उस वक्त भारतीय मीडिया में भी यह खबर साधारण तरीके से कैरी की गई थी, जबकि पाकिस्तानी मीडिया ने इसे प्रमुखता से उठाया था। उस वक्त भारतीय मीडिया को यह स्टोरी बेहद औसत लगी थी, अचानक बजरंगी भाईजान की कृपा से यह स्टोरी हॉट इश्यू बन गया है।
गीता की कहानी दूसरी बार मीडिया के जरिए आम लोगों के सामने है। मीडिया में आ रही खबरों के बाद मोदी सरकार ने जिस तरह संज्ञान लिया है ठीक उसी तरह उस वक्त भी विदेश मंत्रालय तक बात पहुंची थी। विदेश मंत्रालय की पहल पर पाकिस्तान में मौजूद भारतीय दूतावास भी हरकत में आया था। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के अनुसार तत्कालीन एंबेसडर ने एथी फाउंडेशन में रह रही गीता का हाल चाल लिया था। पर कोई सार्थक रिजल्ट सामने नहीं आया। बात आई और गई। 
अब एक बार जब सलमान खान जैसा स्टार शाहिदा नाम की लड़की को सिल्वर स्क्रीन पर लेकर आया है तो अचानक गीता भी छोटे परदे पर छा गई है। भारतीय अखबारों के पन्ने रंगे जा रहे हैं, टीवी स्क्रीन पर स्पेशल इंटरव्यू दिखाए जा रहे हैं। हर किसी को सिर्फ बजरंगी भाईजान ही नजर आ रहे हैं। किसी खबर में यह नहीं बताया जा रहा है कि यह वही गीता है जो तीन साल पहले भी अपने घर की तलाश कर रही थी। हर स्टोरी को बजरंगी भाईजान से जोड़ कर ही दिखाया जा रहा है।
क्या इसे महज संयोग मान लिया जाए, या फिर एक सार्थक मार्केटिंग कैंपेन। जिसमें पता नहीं गीता का कितना भला होगा, पर भाईजान का तो भला हो ही रहा है। बजरंगी भाईजान चंद दिनों में ही तीन सौ करोड़ का आंकड़ा छूने लगी है, अब तो लगता है जिस तरह मीडिया में गीता को बजरंगी भाईजान का अघोषित भाई बनाया जा रहा है उससे कम से कम भाईजान पांच सौ करोड़ तो जरूर कमा लेंगे। क्या कहते हैं आप?
फिलहाल सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान में मौजूद भारतीय दूतावास को गीता की खोजखबर लेने को कहा है। देखते हैं यह खोजखबर 2011-12 की तरह सिर्फ खानापूर्ति होगी या सच में गीता को भारत में खोया उसका परिवार मिल जाएगा। हालांकि भाईजान ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है।