Showing posts with label #ompurui#rambhajanjindabad#ompurilastfilm. Show all posts
Showing posts with label #ompurui#rambhajanjindabad#ompurilastfilm. Show all posts

Saturday, January 7, 2017

पढ़िए ओमपूरी की कुछ अनसुनी दास्तां

रामभजन जिंदाबाद के ‘ओमप्रकाश कंपाउंर’ आप बहुत याद आएंगे
मुंबई से शशि वर्मा 
यार जिंदगी जितने दिनों की है जी लेनी चाहिए। गम तो बहुत हैं, लेकिन इन्हीं गमों के बीच हमें रहना आना चाहिए। यह कुछ ऐसे शब्द थे जिसे मैं ताउम्र याद रखूंगा, क्योंकि इस शब्द को ओमपूरी साहब ने अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया था। पत्नी के विवाद और बेटे से न मिलने की कसक लिए वो इस दुनिया से रुख्सत हो गए हैं, पर अपनी जिंदगी की अंतिम फिल्म में उन्होंने अपने चाहने वालों के साथ-साथ इस करप्ट सिस्टम के लिए बड़ा मैसेज छोड़ दिया है।
हाल के दिनों में ओमपूरी साहब के साथ कई बार मिलना हुआ। वो हमारी फिल्म रामभजन जिंदाबाद के मेन कैरेक्टर हैं। फिल्म इसी 13 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी डेट 3 फरवरी कर दी गई है। रामभजन जिंदाबाद में ओमपूरी साहब ओमप्रकाश कंपाउंडर के रोल में है। यह कंपाउंडर उस करप्ट सिस्टम का हिस्सा होता है जो हमें अपनी जिंदगी में भी कहीं न कहीं दिख ही जाता है। यह फिल्म उनकी आखिरी फिल्म होगी। फिल्म में अपने कैरेक्टर को देखकर उन्होंने कहा था बहुत दिनों बाद कुछ ऐसा करने को मिल रहा है जिसमें मैं लोगों को हंसाऊंगा भी और मैसेज भी दूंगा। यह बहुत बड़ी चीज होती है कि आप हंसाते-हंसाते क्या मैसेज दे जाते हैं। ओप्रकाश कंपाउंडर उस सिस्टम का सूत्रधार है जहां उसकी इच्छा उस मुकाम तक पहुंचना होता है जहां से उसे कोई कुछ न कह सके। यह कंपाउंडर उस ऊंचाई तक पहुंच गया, पर अफसोस अब अपने चाहने वाले दर्शकों का वे कमेंट कभी सुन नहीं पाएंगे।
Aaj Samaj
रामभजन जिंदाबाद के प्रोड्यूसर खालिद किदवई उस रात ओमपूरी साहब के साथ ही थे। जब वे उन्हें घर छोड़कर आए और गाड़ी में उनका पर्स गिरा देखा तो उस वक्त कॉल करना मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने सोचा सुबह कॉल कर दूंगा। पर आज किदवई साहब भी बेहद गमगीन हैं। पर्स तो बहुत छोटी चीज है, पर ओमपूरी साहब जैसे जिंदादील इंसान के साथ बिताए लम्हें सच में बेहद अनमोल हैं। अपने अंतिम दिनों में उन्हें मीडिया से भी नाराजगी थी। नाराजगी इस बात से थी कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश कर दिया जाता रहा। पत्नी नंदिता पूरी के साथ चाहे उनका जो भी व्यक्तिगत या निजी विवाद रहा हो, पर उन्हें इस बात का हमेशा मलाल रहा कि अपने बेटे से भी उन्हें नहीं मिलने दिया जाता।
एक बार मैंने उनका बीबीसी को दिया इंटव्यू पढ़ा था, जिसमें उन्होंने जीवन और मृत्यु के संदर्भ में कुछ बातें कही थी। उन्होंने कहा था मृत्यु का तो आपको पता भी नहीं चलेगा। सोए-सोए चल देंगे। पता नहीं यह बातें उन्होंने क्या सोच कर कही होगी। पर यकीन मानिए दिल जार-जार रो रहा है। कभी नहीं सोचे था सच में वो सोए-सोए ही रुख्सत हो जाएंगे। खमोशी के साथ। बिना शोर किए। रामभजन जिंदाबाद का ओमप्रकाश कंपाउंडर हमसे बहुत दूर अनंत यात्रा पर निकल चुका है। अलविदा ओमपूरी साहब। आपने हम प्यार करने वालों को भले ही अलविदा कह दिया हो, लेकिन हमलोगों के दिलों से कभी रुख्सत नहीं होंगे।
शशि वर्मा रामभजन जिंदाबाद के क्रिएटिव डायरेक्टर हैं।