Friday, September 25, 2015

नशे में कौन नहीं है ये बताओ जरा


शराब पीना अच्छा है या खराब इस पर तर्क-वितर्क करते लंबा वक्त गुजर चुका है, पर आज तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है। नतीजे से मतलब यह है कि या तो इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, या पूरी तरह लागू कर दिया जाए। हालांकि, विदेशों में इसके ठोस रिजल्ट खोज लिए गए हैं, पर भारत में अभी लंबा वक्त लगेगा। वक्त लगने का कारण यह है कि हम अभी तक एकरूपता में यह तय नहीं कर सके हैं कि भारत में किस उम्र से शराब पीने की अनुमति दी जाए। भारत के ही कई प्रदेशों में पूरी तरह शराब बैन है, जबकि कुछ राज्यों में वोटिंग का अधिकार मिलते ही आपको शराब पीने की छूट मिल जाती है। बहस इस बात पर नहीं है कि शराब जरूरी है या गैरजरूरी, पर मंथन का वक्त है कि शराब कब और कितनी मात्रा में पीनी चाहिए।
मेरे आॅफिस में कई सहयोगी हैं, जिनकी उम्र 22 से 30 साल के बीच है। कई बैचलर भी हैं। सैलरी भी अच्छी मिल रही है। युवा हैं तो मौज-मस्ती का अधिकार भी है। पर इन्हीं सहयोगियों में से एक की वीरवार को देर रात तबीयत इतनी खराब हो गई कि उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। डॉक्टर ने धड़ाधड़ चार इंजेक्शन लगाए फिर जाकर पेट दर्द से आराम मिला। खोज खबर ली गई तो पता चला कि लगातार शराब पीने से पेंक्रियाज पर बुरा असर पड़ा है। उम्र कम है। वैवाहिक बंधन में भी नहीं बंधे हैं। सोने पर सुहागा ये है कि हरियाणा में शराब की कीमत भी काफी कम है। पर हमें यह जरूर सोचना चाहिए कि अति हमेशा दुखदायी होती है। शराब पीने से कोई मना नहीं करता है पर अगर संभल कर पिया जाए तो यह उतनी बुरी भी चीज नहीं है।
अगर यह बुरी चीज ही होती तो विश्व भर में इससे मिलने वाला रेवेन्यू क्यों इतना अधिक होता। भारत में ही कई राज्यों का रेवेन्यू शराब बिक्री के कारण काफी अधिक है। यह अलग बात है कि सरकार कभी शराब पीने को प्रोत्साहित नहीं करती, पर इससे होने वाले आर्थिक फायदे के कारण इसे बंद करने के लिए भी नहीं कहती। हां यह भी सही है कि गुजरात, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड जैसे स्टेट में शराबबंदी पूरी तरह लागू है, पर नब्बे प्रतिशत स्टेट ऐसे हैं जहां शराब पीने के मामले में पूरी छूट है। भारत में ही शराब पीने की उम्र को लेकर जबर्दस्त उतार-चढ़ाव मौजूद है। एक तरफ जहां हिमाचल प्रदेश में शराब पीने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तय है वहीं इससे सटे यूनियन टेरिटरी चंडीगढ़ और हरियाणा में न्यूनतम आयुसीमा 25 साल है। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, महाराष्टÑ आदि राज्यों में शराब पीने की न्यूनतम आयु 21 साल निर्धारित है। वहीं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मेघालय जैसे राज्य जहां शराब की सबसे अधिक खपत है, वहां न्यूनतम आयु 25 साल तय की गई है। हिमाचल प्रदेश के अलावा गोवा, मध्यप्रदेश, सिक्किम और उत्तरप्रदेश में आप 18 साल के होते ही शराब पीने का अधिकार पा जाते हैं।

ऐसी स्थिति में जब भारत में शराब पीने की उम्र तक तय है, तो क्या हम शराब पीने की लिमिट को तय नहीं कर सकते। भारत में सिर्फ मोटर व्हीकल (एमवी) एक्ट में ही इस बात का जिक्र है कि हमें कितनी मात्रा में शराब पीनी चाहिए। एमवी एक्ट कहता है कि आपके खून में ब्लड एल्कोहॉल कंटेंट यानि बीएसी की लिमिट 0.03 परसेंट तक ही होनी चाहिए। यानि, सीधे शब्दों में कहा जाए तो 100 एमएल ब्लड में 30 एमएल एल्कोहॉल ही स्वीकार्य है। इससे अधिक मात्रा पाई जाती है तो आपको एमवी एक्ट के तहत सजा दी जा सकती है। पर समझने वाली बात यह है कि सिर्फ सड़क दुर्घटना से बचने के लिए यह लिमिट तय है। जिंदगी की दुर्घटना के लिए कोई लिमिट तय नहीं है। मेरे आॅफिस के सहयोगी के असहनीय दर्द को चार इंजेक्शन से दूर तो कर दिया गया पर, उसे समझाने वाला कोई नहीं मिला कि कितनी मात्रा में शराब पिओगे तो जिंदगी बची रहेगी।
भारत में यह एक बड़ी विडंबना ही है कि जहां एक तरफ सरकार को शराब से करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होता है, वहीं दूसरी तरफ शराब पीकर नशे में किए जाने वाले अपराधों की संख्या भी हर साल बढ़ती ही जा रही है। चाहे शराब पीकर रेप की वारदात हो, छेड़छाड़ हो या फिर मर्डर। हर साल इन आंकड़ों की संख्या राजस्व की तरह बढ़ती ही जा रही है। माना कि सरकार ‘शराब हानिकारक है’ जैसे स्लोगन के साथ विज्ञापन नहीं कर सकती है। पर इतना तो जरूर कर सकती है कि शराब पीने की मात्रा के बारे में युवा पीढ़ी को जागरूक करे।

हम युवाओं को जब वोटिंग का अधिकार 18 साल में देते हैं तो खूब प्रचारित-प्रसारित करते हैं कि अपने वोट का अधिकार कैसे प्रयोग करेंगे। पर वहीं जब शराब पीने का अधिकार देते हैं तो कुछ नहीं बताते। मंथन का वक्त है कि हम कैसे युवाओं को शराब के प्रति जागरूक कर सकते हैं। हम कैसे उन्हें बताएंगे कि कितनी मात्रा में पी जाने वाली शराब आपके शरीर के लिए हानिकारक नहीं है। दरअसल, नशा शराब में नहीं है, नशा शराब की ओवर डोज में है। हमें इसी ओवर डोज पर मंथन करना है। शराबी फिल्म में अमिताभ बच्चन ने भी एक गाने के दौरान शराब का गुणगान किया है, प्रश्न पूछा था कि ‘नशे में कौन नहीं है बताओ जरा’। कहा था ‘नशा शराब में होती तो नाचती बोतल’। इस गाने को तो आज की   युवा पीढ़ी भी खूब चाव से सुनती है और गुनगुनाती है, पर इसी के साथ शराब की ओवर डोज से होने वाले नशे और उसके नुकसान पर मंथन भी युवा पीढ़ी की ही हिम्मेदारी है।


चलते-चलते

दिल्ली में युवाओं की बल्ले-बल्ले
राष्टÑीय राजधानी दिल्ली में शराब पीने की उम्र को लेकर युवाओं की बल्ले-बल्ले हो सकती है। यदि सब कुछ सही रहा तो जल्द ही दिल्ली में 21 साल के युवाओं को शराब पीने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। केजरीवाल सरकार में पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बयान दिया है कि वे इस पर विचार कर रहे हैं। वहीं दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने इस प्रस्ताव के संबंध में कहा कि दिल्ली सरकार के पास अभी तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है। यदि ऐसा कोई विचार कैबिनेट के सामने आएगा तो विचार किया जा सकता है। अभी दिल्ली में उम्र 25 साल है।
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