Wednesday, May 13, 2015

हिन्दी-चीनी कैसे होंगे भाई-भाई?

किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की चीन यात्रा को वैश्विक स्तर पर काफी महत्वूपर्ण माना जाता है। इसके तमाम कारण हैं, पर सबसे बड़ा कारण यह है कि अगर इन दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए तो एशिया में एक ऐसी ताकत का जन्म होगा जो विश्व के सबसे शक्तिशाली देश को आसानी से चुनौती दे सकता है। यह चुनौती आर्थिक स्तर से लेकर तमाम दूसरे स्तर तक का हो सकता है। शायद यही कारण है कि भारतीय प्रधानमंत्रियों के चीन यात्रा की घोषणा के साथ ही सबसे अधिक बेचैनी पश्चिमी देशों में महसूस की जाती है। करीब सात साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री चीन जा रहा है। इससे पहले 2008 में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन की यात्रा की थी तो पश्चिमी देशों के लग
भग सभी अखबारों ने इस यात्रा को अपने प्रथम पन्ने की लीड बनाई थी। हद तो यह थी की भारत चीन के बीच हो रही वार्ता को लगभग सभी अखबारों में कई दिनों तक प्रमुखता से जगह दी गई थी। अब एक बार फिर से भारतीय प्रधानमंत्री की चीन यात्रा हॉट टॉपिक बन गई है। भारतीय मीडिया तो एक हफ्ते पहले से ही वहां पहुंच चुकी है और भारत एवं चीन की सांस्कृति विरासत से लेकर, आर्थिक निर्भरता पर चर्चा कर रही है।
दोस्ती के बीच बॉर्डर की ‘दीवार’
पर सोचने वाली बात यह है कि जो चीन अपनी सीमाओं को लेकर इतना सजग है। हमेशा अपनी हरकतों से भारतीय सेना को परेशान करता रहता है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर जिसकी नियत साफ नहीं है। उत्तराखंड से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के भारतीय बॉर्डर को हर तरफ से घेरता जा रहा है। उत्तराखंड बॉर्डर से लेकर एवरेस्ट तक रेल लाइन बिछाने की कवायद कर रहा है। वही चीन आखिर भारत से इतना आर्थिक रिश्ता क्यों मजबूत कर रहा है।
राजीव गांधी की सार्थक पहल
चीन के साथ 1962 की लड़ाई ने दोनों देशों के बीच काफी कड़वाहट भर दी थी। पर 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दोनों देशों के बीच मित्रता की पहल की और इस मित्रता ने एक ऐसा माइल स्टोन क्रिएट किया, जिसने दोनों देशों में आर्थिक सुधार को एक नया आयाम दिया। आधुनिक चीन के निर्माता कहे जाने वाले देंग शियाओपिंग ने इस दोस्ती को हाथों हाथ लिया। उन्होंने तो यहां तक कहा कि दोनों देश एक दूसरे के बिना प्रगति नहीं कर सकते। भारतीय इतिहास में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यह पहल सुनहरे अक्षरों में लिखी गई। दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों ने कई मुकाम हासिल किए। आज तो हाल यह है कि भारतीय बाजार चीनी प्रोडक्ट से भरे पड़े हैं। दीपावली के दीये भी चीनी बल्ब से चमकते हैं। भारतीयों की आम जिंदगी में भी चीनी प्रोडक्ट ने अपना बाजार स्थापित कर लिया है।
चीन का सबसे बड़ा बाजार भारत
आज चीन के लिए भारत एक ऐसा बाजार बन चुका है, जिसके बगैर वहां की अर्थव्यवस्था चरमरा सी जाएगी। शायद यही कारण है कि चीन ने भी भारत के साथ अपनी मित्रता को और मजबूती देने का मन बना रखा है। जिस तरह मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद शी जिंगपिंग ने भारत की यात्रा की। और अब भारतीय प्रधानमंत्री चीन जा रहे हैं यह एक नए युग की शुरुआत ही मानी जाएगी। आज चीन का आर्थिक विकास भारत से करीब पांच गुणा अधिक है। जनसंख्या के मामले में भले ही हम एक दूसरे के करीब हैं पर आर्थिक मामले में हम काफी पीछे हैं।
कैसे पूरा होगा भाई-भाई का सपना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 मई से शुरू हो रही चीन यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधुनिक भारत की परिकल्पना हो या फिर मेक इंडिया का उनका नारा। यह सब पड़ोसियों के बगैर संभव नहीं है। जापान की यात्रा के बाद नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा इसी कड़ी का अहम हिस्सा है। पर इस दौरान चीन के साथ बॉर्डर पर वक्त बे वक्त के तनाव को भी सुलझाने का सार्थक प्रयास किया जाना जरूरी है। जब तक दोनों देश एक दूसरे पर विश्वास नहीं जताएंगे, तब तक हिंदी चीनी भाई-भाई का सपना अधूरा ही रहेगा। आर्थिक रूप से समृद्धि तभी आ सकती है, जब बॉर्डर पर शांति कायम रहे। दोनों देशों के बीच बॉर्डर मामला सुलझाने के लिए 2003 के बाद से 18 राउंड बैठक हो चुकी है। पर नतीजा जीरो ही रहा है। ऐसे में मोदी की चीन यात्रा का यह पहलू भी महत्वपूर्ण होगा।
क्या ऐहितासिक बन सकेगी यह यात्रा
आने वाले वक्त में दोनों देशों के बीच संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि क्या दोनों देश आज भी देंग शियाओपिंग की नीतियों को प्रासंगिक मानते हैं। आधुनिक चीन की चकाचौंध ने पश्चिमी देशों को भी आकर्षित कर रखा है। कुछ देशों ने तो यह भी मान लिया है कि आने वाला समय चीन का ही होगा। एशिया में चीन का वर्चस्व होगा। पर अगर चीन ने भी ऐसा मान लिया तो यह इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक भूल होगी। चीन और भारत के बीच अब एक ऐसा अन्नयोन्यार्शय संबंध कायम हो चुका है कि दोनों देश एक दूसरे के बगैर अधूरे होंगे। ऐसे में भारतीय प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा एक ऐतिहासिक यात्रा होगी। यह भविष्य की रूपरेखा तय करने वाली यात्रा साबित होगी।
Post a Comment